ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का ऐलान किया गया है, जिसके तुरंत बाद वैश्विक तेल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर के बाद अब सभी जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य खोल दिया गया है।
इस फैसले का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। 17 अप्रैल की शाम जैसे ही यह खबर आई, क्रूड ऑयल के दाम तेजी से गिरने लगे। वैश्विक बाजार में कीमतों में आई इस गिरावट को भारत समेत कई देशों के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है, क्योंकि इससे महंगाई पर लगाम लगने की उम्मीद बढ़ी है।
क्रूड ऑयल में जोरदार गिरावट
घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 11% तक गिरावट दर्ज की गई। भारतीय समयानुसार शाम 7:21 बजे WTI क्रूड करीब 10.91% गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड भी लगभग 10.49% लुढ़ककर 88.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। हालांकि अब हालात में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
भारत के लिए राहत की खबर
तेल की कीमतों में आई गिरावट भारत के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल और करीब 50% गैस आयात करता है। मध्य पूर्व में तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित हुई थी, जिससे कीमतों में तेजी आई थी और महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया था।
हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों ने अभी तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन आने वाले समय में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शेयर बाजार में तेजी की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज खुलने का असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। ईंधन की कीमतों में कमी से कंपनियों की लागत घटेगी, जिससे कई सेक्टर को फायदा हो सकता है।
बीते दिनों महंगे ईंधन के कारण कई कंपनियों और रेस्टोरेंट्स ने अपने उत्पादों और सेवाओं की कीमतें बढ़ा दी थीं। वहीं एलपीजी की बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों और मजदूर वर्ग पर भी पड़ा था।
निष्कर्ष
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का दोबारा खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। इससे न केवल तेल की कीमतों में गिरावट आई है, बल्कि महंगाई और आर्थिक दबाव में भी कमी आने की उम्मीद बढ़ गई है।
